पूजाभेंटसिद्ध स्टोरपंचांगराशिफलज्ञान
हि
हि
GyanStotraSri Navgraha Stotra In Hindi

"नवग्रह स्तोत्र गाइड (2026): गीत, अर्थ और ग्रहों के लाभ"

Sourajit Basu|बुध - 27 मार्च 2024|9 मिनट पढ़ें

शेयर करें

पंडित आनंद एस. द्वारा, ज्योतिष और मंदिर परंपराओं में 15+ वर्षों के अनुभव के साथ वैदिक विद्वान | उत्सव संपादकीय टीम द्वारा समीक्षित

नवग्रह स्तोत्र (Navagraha Stotra) वैदिक ज्योतिष के सबसे आवश्यक भजनों में से एक है, जो भक्त के जीवन में ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करता है। महान ऋषि महर्षि व्यास द्वारा रचित इस स्तोत्र में नौ शक्तिशाली श्लोक हैं, प्रत्येक श्लोक नौ दिव्य पिंडों (ग्रहों) में से एक को समर्पित है जो हमारी कर्म यात्रा को प्रभावित करते हैं। यह केवल एक प्रार्थना नहीं है; यह ब्रह्मांडीय सामंजस्य का एक उपकरण है। 5 लाख से अधिक भक्तों ने उत्सव के सत्यापित मंदिर पूजाओं के माध्यम से ग्रहों के उपाय खोजे हैं।

Navagraha Stotra
नवग्रह स्तोत्र

त्वरित उत्तर: नवग्रह स्तोत्र

  • क्या: नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, केतु) को शांत करने के लिए नौ श्लोकों का संस्कृत भजन।
  • क्यों: नकारात्मक ग्रहों के प्रभाव (दोष) को कम करने, बाधाओं को दूर करने और स्वास्थ्य, धन और शांति के लिए सकारात्मक ऊर्जा बढ़ाने के लिए इसका जाप किया जाता है।
  • किसने लिखा: परंपरागत रूप से महर्षि व्यास को श्रेय दिया जाता है, जो महाभारत के संकलनकर्ता भी थे।
  • कैसे भाग लें: आप ₹501 की दक्षिणा के साथ सत्यापित मंदिरों में नवग्रह शांति पूजा में भाग ले सकते हैं।

विषय सूची

  • नवग्रह स्तोत्र की रचना किसने की?
  • नवग्रह स्तोत्र: अंग्रेजी में संपूर्ण पाठ
  • नवग्रह स्तोत्र का श्लोक-दर-श्लोक अर्थ
  • इस स्तोत्र के जाप के क्या लाभ हैं?
  • नवग्रह स्तोत्र का जाप कैसे करें (संपूर्ण विधि)
  • उत्सव पर ग्रह शांति पूजा में भाग लें
  • स्रोत और संदर्भ

नवग्रह स्तोत्र की रचना किसने की?

नवग्रह स्तोत्र की रचना का श्रेय परंपरागत रूप से महर्षि व्यास (Maharishi Vyasa) को दिया जाता है, जो हिंदू परंपरा के सबसे सम्मानित ऋषियों में से एक हैं। वेद व्यास के रूप में जाने जाने वाले, वे वही महान व्यक्ति हैं जिन्होंने एक आदिम वेद को चार भागों में वर्गीकृत किया—ऋग्वेद, यजुर्वेद, सामवेद और अथर्ववेद। वे महाकाव्य महाभारत, पुराणों और ब्रह्म सूत्रों के लेखक भी हैं। पौराणिक साहित्य के अनुसार, व्यास एक अमर (चिरंजीवी) हैं जो वैदिक ज्ञान के संरक्षण को सुनिश्चित करने के लिए युगों तक जीवित रहते हैं। उनकी रचना इस स्तोत्र को अत्यधिक अधिकार और आध्यात्मिक महत्व प्रदान करती है, इसे अन्य मूलभूत धर्मग्रंथों की श्रेणी में रखती है।

यह कोई सामान्य पाठ नहीं है। यह स्पंदनों (मंत्रों) का एक सटीक रूप से तैयार किया गया समूह है जिसे एक भक्त की चेतना को ग्रहों की ब्रह्मांडीय आवृत्तियों के साथ संरेखित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। वैदिक विचार में, ध्वनि (शब्द) एक रचनात्मक शक्ति है। प्रत्येक श्लोक में विशिष्ट उपाधियाँ और विवरण ज्योतिष (वैदिक ज्योतिष) की गहरी परतों से लिए गए हैं ताकि उस ग्रह की अनूठी ऊर्जा का आह्वान किया जा सके। इसे अपनी आत्मा के लिए एक आध्यात्मिक ट्यूनिंग फोर्क के रूप में सोचें; इन श्लोकों का जाप करके, आप अपने स्वयं के ऊर्जा क्षेत्र को खगोलीय पिंडों के साथ सामंजस्यपूर्ण रूप से प्रतिध्वनित करने के लिए पुन: समायोजित कर रहे हैं, न कि उनसे बाधित होने के लिए।

नवग्रह स्तोत्र: अंग्रेजी में संपूर्ण पाठ

यहाँ पाठ के लिए नवग्रह स्तोत्र का संपूर्ण पाठ दिया गया है। यह नौ ग्रहों में से प्रत्येक के लिए एक श्लोक के साथ संरचित है।

ॐ श्री गणेशाय नमः ।
Om Shri Ganeshaya Namah

श्लोक 1: सूर्य (Sun)

Japaa kusuma Sankaasam - Kaasyapeyam Mahaath'yuthim
Thamo'urim sarva paapa ganam - Pranathosmi Divaakaram

श्लोक 2: चंद्र (Moon)

Dhathi sanka thushaaraabam - Ksheero Dhaarnava Sambhavam
Namaami sasinam Somam - Sambhor makuta bhooshanam

श्लोक 3: मंगल (Mars)

Dharanee garbha sambhootham - Vidhyuth kaanthi sama prabham
Kumaaram sakthi hasthancha - Mangalam pranamaam Yaham

श्लोक 4: बुध (Mercury)

Priyangu kalikaa syaamam - Roope'naa prathimam Budham
Sowmyam sowmya guno'petham - tham Budham pranamaam Yaham

श्लोक 5: गुरु (Jupiter)

Dhe'vaanaancha Risheenaancha - Gurum kaanchana sannibham
Bhudhdhi bhootham Thrilokesam - tham namaami Brihaspathim

श्लोक 6: शुक्र (Venus)

Hima kundha mrinaa laabam - Dhaithyaanam paramam Gurum
Sarva saasthra pravruththaaram - Bhaargavam pranamaam Yaham

श्लोक 7: शनि (Saturn)

Neelaanchana samaabaasam - Ravi puthram Yamaagrajam
Chaayaa maarthaanda sambhootham - tham namaami Sanaischaram

श्लोक 8: राहु

Ardha kaayam mahaa veeryam - Chandhraadhithya vimardhanam
Simhikaa garbha sambhootham - tham Raahum pranamaam Yaham

श्लोक 9: केतु

Palaasa pushpa sankaasam - thaarakaa graha masthakam
Rowdhram rowdhraathmakam go'ram - tham Kethum pranamaam Yaham

नवग्रह स्तोत्र का श्लोक-दर-श्लोक अर्थ

इन शक्तिशाली श्लोकों के पीछे का अर्थ समझने से आपका जाप और भी प्रभावी हो जाता है। प्रत्येक ग्रह केवल एक भौतिक पिंड नहीं है, बल्कि एक विशिष्ट ब्रह्मांडीय कार्य के साथ एक दिव्य व्यक्तित्व है। यहाँ बताया गया है कि आप प्रत्येक ग्रह के लिए क्या आह्वान कर रहे हैं, जो वैदिक विद्वानों के अनुवाद पर आधारित है।

1. सूर्य (Sun): "मैं सूर्य को नमन करता हूँ, जो गुड़हल के फूल के समान तेजस्वी हैं, कश्यप के पुत्र, दीप्तिमान और अंधकार के शत्रु हैं। वे सभी पापों के विनाशक हैं।" सूर्य आपकी आत्मा (Atma), जीवन शक्ति, अहंकार, नेतृत्व गुणों और आपके पिता के साथ आपके संबंधों को नियंत्रित करता है।

2. चंद्र (Moon): "मैं चंद्रमा को नमन करता हूँ, जो दही और शंख के समान श्वेत हैं, जो क्षीर सागर के मंथन से उत्पन्न हुए हैं। वे भगवान शिव के मुकुट को सुशोभित करते हैं।" चंद्रमा आपके मन (Manas), भावनाओं, माता, पालन-पोषण की प्रवृत्ति और सार्वजनिक जीवन को नियंत्रित करता है।

3. मंगल (Mars): "मैं पृथ्वी से जन्मे मंगल को नमन करता हूँ, जो बिजली की चमक के साथ चमकते हैं। वे एक युवक हैं, जो भाला धारण करते हैं।" मंगल आपकी ऊर्जा, साहस, महत्वाकांक्षा, भाई-बहन और तर्क का प्रतिनिधित्व करता है। इस ग्रह के लिए एक शक्तिशाली प्रार्थना को मंगल दान सेवा द्वारा समर्थित किया जा सकता है।

4. बुध (Mercury): "मैं बुध को नमन करता हूँ, जो प्रियंगु जड़ी-बूटी की कली के समान श्याम हैं, जिनकी सुंदरता अतुलनीय है। वे सौम्य हैं और सभी मनभावन गुणों से युक्त हैं।" बुध आपकी बुद्धि (Buddhi), संचार, सीखने, व्यवसाय और तंत्रिका तंत्र को नियंत्रित करता है।

5. गुरु (Jupiter): "मैं देवताओं और ऋषियों के गुरु बृहस्पति को नमन करता हूँ, जो सोने की तरह चमकते हैं। वे बुद्धि के प्रतीक हैं और तीनों लोकों पर शासन करते हैं।" बृहस्पति ज्ञान, भाग्य, उच्च ज्ञान, शिक्षकों (गुरुओं) और बच्चों का प्रतिनिधित्व करता है।

6. शुक्र (Venus): "मैं शुक्र को नमन करता हूँ, जो चमेली के फूल के समान गोरे हैं और राक्षसों के परम गुरु हैं। वे सभी शास्त्रों के स्वामी हैं।" शुक्र आपके रिश्तों, विलासिता, सौंदर्य, रचनात्मकता और कामुक सुखों को नियंत्रित करता है।

7. शनि (Saturn): "मैं धीमी गति से चलने वाले शनि को नमन करता हूँ, जिनका रंग गहरा नीला है। वे यम के बड़े भाई और सूर्य और छाया के पुत्र हैं।" शनि कर्म का फल देने वाले हैं, जो अनुशासन, जिम्मेदारी और दीर्घायु सिखाते हैं। उन्हें प्रसन्न करने के लिए, आप शनि शांति पूजा में भाग ले सकते हैं।

8. राहु: "मैं राहु को नमन करता हूँ, जिनका आधा शरीर है और जो महान पराक्रमी हैं। वे सूर्य और चंद्रमा को पीड़ा देते हैं और सिंहिका के गर्भ से पैदा हुए थे।" राहु महत्वाकांक्षा, सांसारिक इच्छाओं, अचानक घटनाओं, विदेशी प्रभावों और प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करता है।

9. केतु: "मैं केतु को नमन करता हूँ, जो पलाश के फूल जैसा दिखता है और तारों का सिर है। वह उग्र, भयानक और भयावह है।" केतु आध्यात्मिक मुक्ति (मोक्ष), अंतर्ज्ञान, वैराग्य और पिछले कर्मों का प्रतिनिधित्व करता है। दोनों ग्रहों के लिए, एक राहु-केतु शनि पूजा अत्यधिक प्रभावी है।

इस स्तोत्र के जाप के क्या लाभ हैं?

ज्योतिष विशेषज्ञों के अनुसार, नवग्रह स्तोत्र का नियमित और भक्तिपूर्वक जाप करने से गहरे लाभ मिलते हैं। यह उन सभी के लिए एक मूलभूत अभ्यास है जो जीवन की चुनौतियों का शालीनता से सामना करना चाहते हैं।

  • अशुभ प्रभावों को कम करता है: यह प्राथमिक लाभ है। यह स्तोत्र आपकी जन्म कुंडली में कमजोर या पीड़ित ग्रहों को शांत करने में मदद करता है, जिससे उनके नकारात्मक प्रभाव (दोष) कम होते हैं। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए अनुशंसित है जो शनि की साढ़े साती, मंगल दोष (कुज दोष), या राहु और केतु से पीड़ित होने जैसी कठिन ग्रह अवधियों (दशाओं) या गोचर का अनुभव कर रहे हैं।
  • सकारात्मक ग्रहों को मजबूत करता है: यह सिर्फ बुरे को कम नहीं करता; यह अच्छे को बढ़ाता है। जाप अच्छी तरह से स्थित ग्रहों (शुभ ग्रहों) के सकारात्मक प्रभावों को बढ़ाता है। उदाहरण के लिए, यदि आपकी कुंडली में बृहस्पति मजबूत है, तो इसके श्लोक का पाठ करने से ज्ञान, समृद्धि और भाग्यशाली अवसरों में और वृद्धि हो सकती है।
  • स्वास्थ्य और जीवन शक्ति में सुधार करता है: वैदिक ज्योतिष में, प्रत्येक ग्रह शरीर के विशिष्ट अंगों और संभावित बीमारियों को नियंत्रित करता है। सूर्य हड्डियों, मंगल रक्त और शनि तंत्रिका तंत्र पर शासन करता है। इन ग्रहों की ऊर्जा को संतुलित करके, यह स्तोत्र आध्यात्मिक उपचार के रूप में कार्य करता है, जो शारीरिक स्वास्थ्य और लचीलेपन को बढ़ावा देता है।
  • बाधाओं को दूर करता है: ग्रहों की ऊर्जाओं में सामंजस्य स्थापित करके, यह स्तोत्र आपके करियर, रिश्तों और स्वास्थ्य में आने वाली रुकावटों को दूर करने में मदद करता है। चीजें बेहतर ढंग से प्रवाहित होने लगती हैं, जैसे कि ब्रह्मांडीय घर्षण कम हो गया हो।
  • मानसिक शांति को बढ़ावा देता है: मंत्रों के कंपन का मन पर शांत प्रभाव पड़ता है, जिससे ग्रहों के गोचर के कारण होने वाली चिंता, भ्रम और भावनात्मक उथल-पुथल कम हो जाती है। यह मानसिक संकट के खिलाफ एक आध्यात्मिक ढाल के रूप में कार्य करता है।
  • समग्र कल्याण में सुधार करता है: एक संतुलित ज्योतिषीय कुंडली एक संतुलित जीवन की ओर ले जाती है। भक्त अक्सर स्वास्थ्य, धन, रिश्तों और समग्र खुशी में सुधार की रिपोर्ट करते हैं, और अपने जीवन के उद्देश्य के साथ अधिक संरेखित महसूस करते हैं।

नवग्रह स्तोत्र का जाप कैसे करें (संपूर्ण विधि)

अधिकतम लाभ प्राप्त करने के लिए, ज्योतिष पंडित एक सरल प्रक्रिया (विधि) का पालन करने की सलाह देते हैं। यह जटिल नहीं है, लेकिन अनुशासन और ईमानदारी (श्रद्धा) महत्वपूर्ण हैं।

  1. तैयारी: स्नान करके (या कम से कम हाथ, पैर और चेहरा धोकर) और स्वच्छ वस्त्र पहनकर शुरुआत करें। शारीरिक स्वच्छता मानसिक स्पष्टता को बढ़ावा देती है। खाली पेट या केवल हल्का, सात्विक भोजन करने के बाद जाप करना सबसे अच्छा है।
  2. समय: सबसे शुभ समय ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से 96 मिनट पहले की अवधि) के दौरान होता है। इस समय के दौरान, वातावरण शुद्ध और सात्विक होता है, और मन आध्यात्मिक स्पंदनों के प्रति सबसे अधिक ग्रहणशील होता है। यदि यह संभव न हो तो सूर्योदय के बाद जाप करना भी शक्तिशाली होता है।
  3. व्यवस्था: एक साफ आसन (चटाई) पर पूर्व की ओर मुख करके बैठें। आप अपने सामने नवग्रहों की तस्वीर या यंत्र रख सकते हैं और घी या तिल के तेल का दीपक जला सकते हैं। विशिष्ट फूल चढ़ाने से संबंध बढ़ सकता है: सूर्य और मंगल के लिए लाल, चंद्र और शुक्र के लिए सफेद, बृहस्पति के लिए पीला, शनि के लिए नीला/काला, और दूसरों के लिए मिश्रित रंग।
  4. आह्वान: अभ्यास से किसी भी बाधा को दूर करने के लिए तीन बार "ओम गणेशाय नमः" का जाप करके शुरू करें। आप अपने गुरु या इष्ट देवता (व्यक्तिगत देवता) से एक छोटी प्रार्थना भी कर सकते हैं।
  5. पाठ: पूरे नवग्रह स्तोत्र का स्पष्ट उच्चारण और भक्ति के साथ जाप करें। पाठ करते समय प्रत्येक श्लोक के अर्थ पर ध्यान केंद्रित करें। सामान्य कल्याण के लिए, प्रतिदिन एक पाठ पर्याप्त है। विशिष्ट मुद्दों के लिए, पंडित इसे 9 या 11 बार जपने की सलाह दे सकते हैं।
  6. समापन: पाठ पूरा करने के बाद, कुछ मिनटों के लिए ध्यान में चुपचाप बैठें, मंत्रों के कंपन को महसूस करें। नौ ग्रहों से अपनी प्रार्थना करें और उनकी कृपा और मार्गदर्शन मांगें।
  7. निरंतरता: नियमित अभ्यास से सर्वोत्तम परिणाम मिलते हैं। एक बार भी लगातार दैनिक पाठ, कभी-कभी कई बार जाप करने से कहीं अधिक शक्तिशाली होता है। इसे अपनी दैनिक आध्यात्मिक दिनचर्या (नित्य कर्म) का हिस्सा बनाएं।

उत्सव पर ग्रह शांति पूजा में भाग लें

यद्यपि नवग्रह स्तोत्र का व्यक्तिगत पाठ शक्तिशाली है, एक औपचारिक ग्रह शांति पूजा करना इसके प्रभावों को बढ़ा सकता है। पवित्र मंदिरों में सत्यापित पंडित आपकी ओर से इन अनुष्ठानों को कर सकते हैं।

ग्रहों के सामंजस्य के लिए अनुशंसित पूजाएँ:
- **नवग्रह शांति पूजा:

शेयर करें