पूजाभेंटसिद्ध स्टोरपंचांगराशिफलज्ञान
हि
हि
GyanTithi RitualsKajari Teej 2026 Date Muhurat ...

कजरी तीज 2026: तिथि, मुहूर्त, महत्व और पूजा विधि

श्री सस्वता एस.|शुक्र - 31 जुल॰ 2026|10 मिनट पढ़ें

शेयर करें

पंडित आनंद एस. द्वारा, मंदिर परंपराओं में 15+ वर्षों के अनुभव वाले व्रत विधि विशेषज्ञ | उत्सव संपादकीय टीम द्वारा समीक्षित

कजरी तीज 2026 में रविवार, 30 अगस्त को है। यह महत्वपूर्ण हिंदू त्योहार, जो भाद्रपद महीने के कृष्ण पक्ष के तीसरे दिन मनाया जाता है, भगवान शिव और देवी पार्वती के दिव्य मिलन को समर्पित है। विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और समृद्धि के लिए एक पवित्र व्रत रखती हैं, जिससे यह दिन अत्यधिक भक्तिमय शक्ति का प्रतीक बन जाता है।

तीज के दौरान देवी पार्वती और भगवान शिव
तीज के दौरान देवी पार्वती और भगवान शिव

विषय-सूची

  • कजरी तीज 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त
  • हम कजरी तीज क्यों मनाते हैं
  • कजरी तीज की कहानी (व्रत कथा)
  • कजरी तीज पूजा विधि: चरण-दर-चरण
  • कजरी तीज सामग्री सूची
  • कजरी तीज के लिए प्रमुख मंत्र
  • तीज माता आरती: ओम जय शिव ओमकारा
  • कजरी तीज व्रत के नियम (व्रत विधि)
  • कजरी तीज पर क्या करें और क्या न करें
  • भारत में कजरी तीज कैसे मनाई जाती है
  • स्रोत और संदर्भ

कजरी तीज 2026: तिथि और शुभ मुहूर्त

प्रमाणित पंचांग डेटा के अनुसार, कजरी तीज 2026 का समय व्रत को सही ढंग से करने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ एक तारीख नहीं है; यह एक विशिष्ट चंद्र समय है। आपको तिथि के आरंभ और अंत के समय पर पूरा ध्यान देना होगा ताकि आपका व्रत और पूजा उस दिन की ब्रह्मांडीय ऊर्जाओं के साथ मेल खाए।

  • तिथि: रविवार, 30 अगस्त, 2026
  • तिथि: भाद्रपद कृष्ण पक्ष तृतीया
  • तृतीया तिथि आरंभ: 09:36 AM, 30 अगस्त, 2026 को
  • तृतीया तिथि समाप्त: 08:50 AM, 31 अगस्त, 2026 को
  • चंद्रोदय का समय (अर्घ्य के लिए): लगभग 08:45 PM (स्थान के अनुसार भिन्न)

यहाँ उन प्रमुख शहरों के लिए शुभ समय का विवरण दिया गया है जहाँ यह त्योहार प्रमुखता से मनाया जाता है। यह क्यों मायने रखता है? क्योंकि स्थानीय सूर्योदय और चंद्रोदय का समय मुहूर्त को थोड़ा बदल सकता है।

शहरपूजा मुहूर्त (शाम)
दिल्ली07:15 PM से 08:45 PM
जयपुर07:20 PM से 08:50 PM
वाराणसी06:55 PM से 08:25 PM
लखनऊ07:00 PM से 08:30 PM

हम कजरी तीज क्यों मनाते हैं

इस त्योहार का आध्यात्मिक सार, जैसा कि शिव पुराण (शिव पुराण) में वर्णित है, अटूट भक्ति का उत्सव है। यह भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए देवी पार्वती की कठोर तपस्या (तपस्या) का स्मरण कराता है। इसलिए, जब आप यह व्रत रखते हैं, तो आप उसी दिव्य स्त्री ऊर्जा और दृढ़ संकल्प से जुड़ते हैं। यह प्रेम और प्रतिबद्धता का एक शक्तिशाली प्रतीक है।

यह दिन केवल विवाहित महिलाओं के लिए अपने पति की लंबी आयु की प्रार्थना करने के लिए नहीं है। यह अविवाहित महिलाओं के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है, जो भगवान शिव जैसे समर्पित और योग्य पति के लिए प्रार्थना करती हैं। यह त्योहार वैवाहिक आनंद, त्याग और आस्था की गहन शक्ति के सार को खूबसूरती से दर्शाता है। मानसून की पृष्ठभूमि, अपने काले बादलों (काजल) के साथ, अलगाव के दर्द का प्रतीक है जो पुनर्मिलन की खुशी से दूर हो जाता है - जो दिव्य प्रेम कहानी को दर्शाता है।

कजरी तीज की कहानी (व्रत कथा)

पारंपरिक व्रत कथा, जो अक्सर शाम की पूजा के दौरान सुनाई जाती है, एक बहुत ही मार्मिक कहानी बताती है जो त्योहार के मूल्यों को दर्शाती है। यह सिर्फ एक कहानी नहीं है; यह एक शिक्षा है। कहानी एक गाँव के एक गरीब ब्राह्मण जोड़े पर केंद्रित है। पत्नी, देवी पार्वती की एक सच्ची भक्त, ने कठिन कजरी तीज व्रत रखने का फैसला किया, लेकिन उसके पास नैवेद्य के रूप में चढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं था।

उसके पति ने उसकी परेशानी देखकर कुछ खोजने के लिए अंधेरे जंगल में चला गया। उसने एक दुकानदार के बंडल से सत्तू (भुने चने का आटा) का एक छोटा पैकेट चुरा लिया। जब वह पकड़ा गया, तो उसने अपने इस कार्य का कारण बताया - उसकी पत्नी का अटूट व्रत। दुकानदार, उसकी कहानी और पत्नी की भक्ति से प्रभावित होकर, न केवल उसे माफ कर दिया, बल्कि उसे पूजा के लिए और भी सामान उपहार में दिया। यह कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि सच्ची भक्ति और नेक इरादे ही ईश्वर को प्रसन्न करते हैं, न कि कोई भौतिक धन। यह आस्था की शक्ति का एक सुंदर अनुस्मारक है।

कजरी तीज पूजा विधि: चरण-दर-चरण

पारंपरिक पंडितों द्वारा की जाने वाली कजरी तीज की पूजा विधि एक हार्दिक प्रक्रिया है जो भक्ति को विशिष्ट अनुष्ठानों के साथ जोड़ती है। इन चरणों का पालन करने से आपको तीज माता (देवी पार्वती) की दिव्य ऊर्जाओं से जुड़ने में मदद मिलती है। जल्दबाजी न करें; हर कदम का अपना अर्थ है।

  1. संकल्प (व्रत): सुबह सबसे पहले, शुद्ध स्नान के बाद, पूर्व की ओर मुख करके अपने पति और परिवार की भलाई के लिए पूरी भक्ति के साथ व्रत रखने का संकल्प (संकल्प) लें। आप अपना नाम, गोत्र और इरादा बताते हुए हाथ में जल, फूल और एक सिक्का रखेंगे।
  2. पवित्र स्थान बनाना: एक साफ वेदी तैयार करें। मिट्टी से एक छोटा तालाब जैसा ढांचा बनाएं और उसके बगल में नीम की एक टहनी (तीज माता का प्रतीक) रखें। यह प्रकृति और उर्वरता का प्रतिनिधित्व करता है।
  3. मूर्ति पूजा: भगवान शिव और देवी पार्वती की एक छोटी मूर्ति या तस्वीर रखें। यदि आपके पास नहीं है, तो नीम की टहनी को ही देवी के रूप में पूजा जाता है।
  4. श्रृंगार अर्पण (चढ़ावा): यह आवश्यक है। देवी पार्वती को दुल्हन के श्रृंगार की 16 वस्तुएं (सोलह श्रृंगार) अर्पित करें। इसमें चूड़ियाँ, सिंदूर, बिंदी, मेहंदी और एक लाल चुनरी शामिल है।
  5. नैवेद्य: सत्तू से बनी मिठाइयाँ, फल और अन्य शुद्ध शाकाहारी खाद्य पदार्थ चढ़ाएं।
  6. कथा वाचन: शाम को, अन्य महिलाओं के साथ इकट्ठा होकर एक दीपक जलाएं और कजरी तीज व्रत कथा सुनें या पढ़ें। यह पूजा का हृदय है।
  7. कजरी गायन: कजरी के नाम से जाने जाने वाले पारंपरिक लोक गीत गाएं। प्रेम और लालसा के ये गीत भक्तिमय वातावरण को बढ़ाते हैं।
  8. चंद्र पूजा (अर्घ्य): यह चरमोत्कर्ष है। जब चंद्रमा दिखाई दे, तो उसे अर्घ्य (दूध, कुमकुम और फूलों के साथ मिश्रित जल का अर्पण) दें। आप अपने पति का चेहरा एक छलनी के माध्यम से देखती हैं, और फिर चंद्रमा को।
  9. व्रत तोड़ना: चंद्रमा को अर्घ्य देने के बाद, आप अपने पति के हाथों से पानी पीकर और प्रसाद खाकर अपना व्रत तोड़ सकती हैं।

कजरी तीज सामग्री सूची

तैयार रहना एक शांतिपूर्ण पूजा की कुंजी है। यहाँ उन सभी चीजों की एक संरचित सूची है जिनकी आपको आवश्यकता होगी। एक तालिका का उपयोग करने से चीजों को जांचना बहुत आसान हो जाता है।

श्रेणीवस्तुउद्देश्य
पूजा सामग्रीकुमकुम, हल्दी, चंदन, अक्षततिलक और चढ़ावे के लिए
देवता और प्रतीकशिव-पार्वती की मूर्ति/फोटो, नीम की टहनीपूजा का मुख्य केंद्र
चढ़ावासत्तू की मिठाई, फल, नारियल, घीनैवेद्य (भोजन का चढ़ावा)
व्रत सामग्रीसोलह श्रृंगार की वस्तुएं, लाल चुनरीदेवी के श्रृंगार के लिए
अनुष्ठान के लिएमिट्टी, दीया, अगरबत्ती, छलनीपवित्र स्थान बनाने और चंद्र दर्शन के लिए
भक्त के लिएनए पारंपरिक कपड़े (लाल/हरा)शुभता और पवित्रता का प्रतीक

कजरी तीज के लिए प्रमुख मंत्र

देवी पार्वती का यह शक्तिशाली मंत्र दिन भर आपके जाप का आधार होना चाहिए। माना जाता है कि जप से उत्पन्न पवित्र कंपन वातावरण और भक्त की चेतना को शुद्ध करते हैं। यह सरल, सीधा है, और इसमें देवी माँ की ऊर्जा है। इसका जाप आपके मन को केंद्रित करता है और आपके व्रत के आध्यात्मिक प्रभाव को गहरा करता है।

पार्वती मूल मंत्र:

ॐ पार्वत्यै नमः

Om Parvatyai Namah

अर्थ: "मैं देवी पार्वती को नमन करती हूँ।" यह मौलिक अभिवादन उनकी दिव्य ऊर्जा का आह्वान करता है, स्थायी वैवाहिक सद्भाव, आंतरिक शक्ति और अटूट भक्ति के लिए उनका आशीर्वाद मांगता है।

चूंकि कजरी तीज शिव और पार्वती के पवित्र मिलन का उत्सव है, इसलिए भगवान शिव का सम्मान करना भी आवश्यक है।

शिव मूल मंत्र:

ॐ नमः शिवाय

Om Namah Shivaya

अर्थ: "मैं भगवान शिव को नमन करता हूँ।" इस मंत्र का जाप दिव्य पुरुष ऊर्जा को स्वीकार करता है और उस ब्रह्मांडीय साझेदारी का सम्मान करता है जिसका यह त्योहार उत्सव मनाता है।

जाप: सर्वोत्तम परिणामों के लिए शाम की पूजा के दौरान रुद्राक्ष या तुलसी माला का उपयोग करके पार्वती मंत्र का 108 बार जाप करें। यह पवित्र संख्या आध्यात्मिक पूर्णता का प्रतिनिधित्व करती है। माला का उपयोग करने से एकाग्रता में मदद मिलती है, जिससे आप जप के ध्यानपूर्ण गुण में पूरी तरह से डूब सकते हैं।

तीज माता आरती: ओम जय शिव ओमकारा

पूजा का सुंदर समापन आत्मा को झकझोर देने वाली 'ओम जय शिव ओमकारा' आरती के साथ होता है। चूंकि कजरी तीज दिव्य जोड़े का उत्सव मनाती है, इसलिए यह आरती, जो भगवान शिव और देवी पार्वती दोनों की प्रशंसा करती है, करने के लिए सबसे उपयुक्त है। यह घर को दिव्य कंपनों से भर देती है।

ओम जय शिव ओमकारा आरती:

ॐ जय शिव ओंकारा, स्वामी जय शिव ओंकारा।
ब्रह्मा, विष्णु, सदाशिव, अर्द्धांगी धारा॥

Om Jai Shiv Omkara, Swami Jai Shiv Omkara,
Brahma, Vishnu, Sadashiv, Ardhangi Dhara.

अर्थ: यह आरती भगवान शिव की महिमा का गुणगान करती है, जो ब्रह्मा और विष्णु द्वारा पूजे जाने वाले एक सर्वोच्च प्राणी हैं। यह देवी पार्वती को उनकी अविभाज्य अर्धांगिनी (अर्धांगी) के रूप में भी सम्मानित करती है।

गायन: व्रत तोड़ने से ठीक पहले, चंद्र पूजा के बाद पूरे परिवार के साथ इस आरती को एक बार गाएं।

कजरी तीज व्रत के नियम (व्रत विधि)

कजरी तीज की व्रत विधि काफी सख्त है, यही कारण है कि इसके आध्यात्मिक पुरस्कार बहुत बड़े माने जाते हैं। यह दृढ़ संकल्प और आस्था की परीक्षा है। अधिकांश महिलाएं निर्जला व्रत रखती हैं, जिसका अर्थ है कि वे दिन भर भोजन और पानी दोनों से दूर रहती हैं।

व्रत 30 अगस्त, 2026 को सूर्योदय से शुरू होता है और चंद्रमा को देखने और उसे अर्घ्य देने के बाद ही तोड़ा जाता है। आपको क्या बचना चाहिए? सभी अनाज, नमक, प्याज, लहसुन और कोई भी तामसिक (गैर-सात्विक) भोजन सख्त वर्जित है। व्रत एक घूंट पानी और पूजा के दौरान चढ़ाए गए सत्तू प्रसाद से तोड़ा जाता है। यह अनुशासन ही व्रत को इतना शक्तिशाली बनाता है।

कजरी तीज पर क्या करें और क्या न करें

व्रत की पवित्रता बनाए रखने और इसके आध्यात्मिक लाभों को अधिकतम करने के लिए, यहाँ कुछ सरल दिशानिर्देश दिए गए हैं। इन्हें प्रतिबंधों के रूप में नहीं, बल्कि अपने ध्यान को शुद्ध रखने के तरीकों के रूप में सोचें।

क्या करें:
- ब्रह्म मुहूर्त (सूर्योदय से पहले) में उठें।
- नए या साफ कपड़े पहनें, अधिमानतः लाल, हरे या पीले जैसे शुभ रंगों में।
- अपने हाथों और पैरों पर मेहंदी लगाएं।
- दिन भजन गाने, मंत्रों का जाप करने और व्रत कथा पढ़ने में बिताएं।
- यदि संभव हो तो झूले पर झूलें, क्योंकि यह एक प्रिय परंपरा है।
- शांत और सकारात्मक मन की स्थिति बनाए रखें।

क्या न करें:
- क्रोध, बहस या किसी भी नकारात्मक भाषण से बचें।
- यदि आप निर्जला व्रत रख रही हैं तो कोई भी भोजन या पानी का सेवन न करें।
- दिन के समय सोने से बचें।
- काले या सफेद कपड़े न पहनें।
- किसी भी तरह की गपशप या कठोर भाषा से बचें।

भारत में कजरी तीज कैसे मनाई जाती है

हालांकि शिव और पार्वती के प्रति मुख्य भक्ति सार्वभौमिक है, क्षेत्रीय परंपराएं कजरी तीज समारोह में सुंदर, अद्वितीय रंग जोड़ती हैं। यह भारत की अविश्वसनीय सांस्कृतिक विविधता का प्रमाण है। दिव्य स्त्री के प्रति यह भक्ति एक ऐसा धागा है जो देश भर के भक्तों को जोड़ता है, बंगाल के भव्य मंदिरों जैसे प्रसिद्ध कालीघाट काली मंदिर कोलकाता इसकी कहानी अतीत से वर्तमान तक से लेकर जम्मू के पहाड़ी मंदिरों तक।

  • राजस्थान: कजरी तीज विशेष रूप से बूंदी में प्रसिद्ध है, जहाँ तीज माता का एक भव्य जुलूस शहर से होकर निकाला जाता है। यहाँ सत्तू से बनी मिठाइयों का सेवन एक प्रमुख आकर्षण है।
  • उत्तर प्रदेश और बिहार: यहाँ, यह त्योहार महिलाओं के इकट्ठा होकर कजरी गाने का पर्याय है - प्रेम और मानसून के मौसम के मधुर लोक गीत। खूबसूरती से सजाए गए झूलों पर झूलना उत्सव का एक अनिवार्य हिस्सा है।
  • मध्य प्रदेश: मध्य भारत में, यह त्योहार व्रत और शाम की पूजा सहित समान अनुष्ठानों के साथ मनाया जाता है। स्थानीय मेले और सामुदायिक समारोह भी आम हैं।

स्रोत और संदर्भ

शास्त्रीय अधिकार:
- शिव पुराण — देवी पार्वती की तपस्या और भगवान शिव के प्रति भक्ति की मूलभूत कहानी प्रदान करता है, जो सभी तीज त्योहारों का आध्यात्मिक आधार है।

विधि / गृह्य सूत्र:
- पारस्कर गृह्य सूत्र — इसमें घरेलू हिंदू अनुष्ठानों (गृह्य) के लिए दिशानिर्देश हैं जो कजरी तीज जैसी घरेलू पूजा विधियों का आधार बनते हैं।

पंचांग और समय:
- Drikpanchang.com — 2026 के लिए तिथि और मुहूर्त के समय की सटीकता के लिए पुष्टि की गई है।
- उत्सव पंचांग (https://utsavapp.in/panchang) — वास्तविक समय की तिथि और मुहूर्त गणना के लिए।

शेयर करें

🪔

पूजा अर्पित करें

🪔
 Triyuginarayan Saptahik (Weekly) Gulab Daan Seva - Utsav Puja

4 Months Daan Recommended

Triyuginarayan Saptahik (Weekly) Gulab Daan Seva

श्री त्रियुगीनारायण मंदिर, Rudraprayag

सोम - 10 अग॰ 2026 - दूसरा श्रावण सोमवार व्रत

2.5k+ भक्त

पूजा करें